window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-6CFPBX2EJR'); रहस्यमय हिंदु मंदिर: जुलाई 2023

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गुरुवार, 27 जुलाई 2023

विश्व स्वरूपम शिव, नाथद्वार, राजस्थान

वीर महाराणाओं की पावन धरती राजस्थान पर दुनिया की सबसे विशाल औऱ ऊंची महादेव की मूर्ति बनाई गई है। राजस्थान के शहर राजसमंद में भोलेनाथ की इस विशाल काय मूर्ति को बनवाने वाले है, मिराज समूह के अध्यक्ष मदन पालीवाल और मूर्तिकार है नरेश कुमावत।


यहां महादेव की विशाल मूर्ति बनाने के पीछे नाथद्वार वासियों की एक मान्यता है। जब महादेव एक समय नाथद्वारा आये थे तो उन्हीने यही आसन ग्रहण किया था। देवों के देव महादेव की मूर्ति ध्यान मुद्रा में है। और भला भोलेनाथ अपनी सवारी नन्दी के बिना कैसे दिख सकते हैं? सो नन्दी की मूर्ति पास ही मानो नृत्य करती हुई मुद्रा में दिखती है।


विश्व स्वरूपम


विश्व स्वरूपम पीछे से




 प्रक्रिया औऱ सामग्री:


विश्व स्वरूपम(Statue of Belief) राजसमंद की गणेश टेकरी पहाड़ी पर बनाया गया है। 

मूर्ति का काम 2018 में शुरू हुआ और लोकार्पण 29 अक्टूबर 2023 को राजस्थान के मुख्यमंत्री जी द्वारा करवाया गया। मूर्ति की ऊँचाई पहले 251 फ़ीट रखी गयी थी किंतु गंगा की जलधारा जोड़ने के चलते ऊंचाई 369 फ़ीट कर दी गयी। मूर्ति का आधार110 फ़ीट में पसरा है। कुल वजन 30000 टन है जो इसे एशिया की किसी भी मूर्ति से सबसे भारी और ऊंची करती है। तांबे का पेंट से रँगी मूर्ति अगले 20 वर्ष तक चमकती रहेगी। मूर्तिकार नरेश कुमावत बताते हैं की मूर्ति अगले 2500 साल तक यूं कि यूं बनी रहेगी चाहे कोई भी प्राकृतिक आपदा क्यों ना आ जाए। मूर्ति बनाने में कुल 30000 टन धातु(पंच धातु) जिसमे 2,600 टन स्टील 2,601 टन लोहा 26,618 क्यूबिक मीटर सीमेंट कंक्रीट 30x25 मीटर उपयोग हुआ है। नन्दी महाराज की ऊंचाई 25 फ़ीट और चौड़ाई 37 फीट की है। मूर्ति का ऊपरी भाग 250किमी तक तेज चलनेवाली हवाओं को भी झेलने की क्षमता रखता है। मूर्ति को बनाने में 90 इंजीनियरों औऱ 900 कारीगरों ने बनाकर तैयार किया है। मूर्त्ति के ऊपरी हिस्से में जाने के लिए 4 लिफ्ट, एक एलेवेटर और 3 कांच सीढ़ियों की व्यवस्था है। श्रद्धालुओं के लिए अंदर एक हॉल की व्यवस्था भी की गई है।



रात्री शिव दर्शन


 महादेव की जटाओं वाले भाग पर दो पानी की टँकीयां लगी है। एक टँकी जलाभिषेक के लिए और दूसरी आपातकाल के लिए। लगाई गई है। मूर्ति के भीतर कुल 15000 लोगों को लेने की क्षमता है। एक दिन में केवल 700 लोग को ही महादेव के अंदर के दर्शन की अनुमति है। एक बार में 60 लोगों को प्रवेश मिलेगा और 10-10 लोगों के जत्थे प्रवेश करते हैं। 


विश्व स्वरूपम मूर्ति को पूरा देखने में दर्शनार्थियों को कम से कम 4 घंटों का समय लगेगा। मूर्ति के ऊपर पहुँचने पर राजसमंद शहर का लुभावना दृश्य देखते ही बनता है। 


मूर्ति दर्शन समय:


  • सुबह 5 से 12:30 बजे तक
  • दोपहर 3 से रात्री 8:30 बजे तक
विश्व स्वरूपम में प्रवेश करने के लिए टिकट की जानकारी, www.statueofbelief.com पर जाके की जा सकती है। 

कैसे पहुँचे:


हवाई मार्ग- राजसमंद से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट उदयपुर का महाराणा प्रताप एयरपोर्ट है जो विश्व स्वरूपम मूर्ति से 57 किमी दूर है। 


रेल मार्ग- राजसमंद से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मावली रेलवे स्टेशन है। विश्व स्वरूपम मूर्ति की स्टेशन से दूरी कुल 29.9 किमी दूर है। 


✒️Swapnil. A



(नोट:- ब्लॉग में अधिकतर तस्वीरें गूगल से निकाली गई हैं।)


अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें:-


  • http//hindi.revoi.in/369-feet-high-shiva-statue-vishvas-swaroopam-inaugurated-in-nathdwara-rajasthan/amp/






इन्हें भी देखे:


सोमवार, 24 जुलाई 2023

चमत्कारी पीताम्बरा पीठ, दतिया, मध्यप्रदेश

दतिया शहर एक आध्यात्मिक नगरी है। पीताम्बरा पीठ को मध्यप्रदेश का छोटा-वृंदावन भी कहा जाता है। यहां साल भर भक्त अपने कार्यों की सिद्धि के लिए यहां आते रहते हैं। सामान्य नागरिक से ज्यादा यहां ऊंची हस्तियां खासकर नेता और उच्च अधिकारी यहां अक्सर देखे जाते हैं। दशम विद्याओं में से दो, माता बगलामुखी औऱ माता धूमावती को समर्पित है। यह दोनों विद्याएं शत्रु नाश और कठिन कार्यों की सिद्धि के लिए जानी जाती है। दतिया धाम के बाहर रहनेवाले निवासी, पीताम्बरा पीठ में घटी तीन चमत्कारी ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में नहीं जानते है। दतिया धाम में बैठी माँ बगलामुखी 

राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की शक्ति रखती है।




मंगलवार, 18 जुलाई 2023

मां बगलामुखी कौन है?

माँ बगलामुखी कौन है?

दशम महाविद्याओं में से अष्टम महाविद्या - माता बगलामुखी है। माता बगलामुखी का वैदिक नाम वल्गामुखी जिसका अर्थ है "लगाम"। इसके अनुरूप माँ को बगला, वलगामुखी, वल्गामुखी, ब्रह्मास्त्र विद्या और पीताम्बरा नामों से पुकारा जाता है। वेदों कि "वल्गा" तंत्र में "बगलामुखी" है। 

माता बगलामुखी अष्टम महाविद्या है और इन्हें मूलतः"स्तम्भनकारी महाविद्या" के रूप में भी जाना जाता है। भगवान नारायण और माता त्रिपुर सुंदरी, दोनों के तेज से निकलने के कारण इनका कुल श्रीकुल है और यह वैष्णव शक्ति है। 


माँ की साधना में पीत रंग सामग्री का प्रयोग अति आवश्यक है। जिसमे आसन से लेके माँ को चढ़ाया जाने वाला प्रशाद भी पीले रंग का होता है। पीली बाती, पीला चोला, पीला आसन और माता की पीले फूलों की माला। माता को हल्दी की माला चढ़ाने से मात अति प्रसन्न होती हैं। 


माँ पीताम्बरा बगलामुखी


माँ पीताम्बरा

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 माता बगलामुखी के तीन चमत्कारिक मंदिर है। पहला मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में, दूसरा पीताम्बरा पीठ, दतिया धाम में माता धूमावती माता का और तीसरा उज्जैन के पास नलखेड़ा, मध्यप्रदेश में। 

यह तीन धाम माता की असीम शक्तियों से लैस हैं। यहां पहुँचने वालों मैं राजा भी होते हैं और रंक भी। यहां माता की सच्चे हृदय से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है। चाहे शत्रु पर विजय हो या मारण, मोहन वशीकरण से मुक्ति पाना। 


हम जानेंगे शाक्त-तंत्र परम्परा में यह मंदिर क्यों इतने गुप्त और रहस्यमयी हैं। इनके पीछे के बनने की कथा  और इनहें स्थापित करने वाले योगीयों के जीवन के रहस्य। 


नलखेड़ा धाम

कांगड़ा धाम


धूमावती माता, दतिया धाम

 

मंगलवार, 11 जुलाई 2023

शिव मंदिर गुफाएँ, पचमढ़ी, मध्य प्रदेश

देश के हृदय जिसे आप मध्य प्रदेश के नाम से जानते है, इस राज्य में सतपुड़ा की मनमोहक वादियों में बसा है देव भूमि उत्तराखंड के पवित्र तीर्थों का एहसास करानेवाला एक पवित्र तीर्थ स्थल जिसका नाम है पचमढ़ी। इस पर्यटन स्थल के पहाड़ों पर घने जंगलों और मन लुभावने झरनों और यहाँ की जानेवाली ट्रैकिंग के लिए जाना जाता है। इतना मनमोहक होने के बावजूद, पचमढ़ी केवल मध्यप्रदेश राज्य की सीमाओं के अंदर ही जाना जाता है। 

पचमढ़ी के प्रसिद्ध शिव तीर्थ:

पचमढ़ी आनेवाले सैलानी और महादेव भक्त यह मानते है कि यहां केवल महादेव के मंदिर ही नहीं पर साथ-साथ स्वयं महादेव अपने अस्तित्वभक्तों को यहां पहाड़ों, झरनों और झाड़ियों में महसूस कराते हैं। फिर बाकी जाकी रही भावना जैसी। 

महादेव भक्तों के लिए साधना करने का मध्यप्रदेश कि भूमि में यह सबसे प्राकृतिक और मनोरम स्थान है। 


पचमढ़ी एक ऐसा पवित्र पर्वतीय तीथ है जो केवल महादेव को समर्पित मन्दिरों के लिए जाना जाता है। इनके नाम है - चौरागढ़ महादेव मंदिर, नागद्वारी, बड़ा महादेव मंदिर गुफा, जटाशंकर और पांडव गुफाएं हैं। बाकी बचे गैर धार्मिक स्थल, हौनडी खो, बाईसन लॉज, बीफाल वॉटरफॉल, रिचगढ़ की गुफाएं और रिचगढ़ गुफाएं हैं। 





तनोट राय माता मंदिर, जैसलमेर, राजस्थान

भारत-पाक सीमा पर तनोट राय माता मंदिर लगभग 1300 वर्षो से स्थापित है जिसकी आध्यात्मिक शक्ति का परिचय सन् 1965 और 1971 के युद्ध के समय शत्रु दे...