window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-6CFPBX2EJR'); रहस्यमय हिंदु मंदिर: Himachal Temples

Translate

Himachal Temples लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Himachal Temples लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 5 अगस्त 2023

बनखंडी बगलामुखी मंदिर, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

पौराणिक इतिहास:

वनखण्डी कस्बा, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश स्थित माता बगलामुखी धाम का पैराणिक इतिहास सतयुग के समय का है। जब  माता सती स्वयं को अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भस्म कर चुकी थी तब महादेव विलाप में समाए हुए के सारे लोकों में उनका शरीर लेके घूम रहे थे तब भगवान नारायण ने देवी सती के अंगों को सुदर्शन चक्र से अलग-अलग अलग कर दिया। इससे माता के अंगों के विभिन्न टुकड़े आर्यव्रत की भूमि पर जा गिरे और यही शक्ति पीठ कह लाये। आ सती के अंगों से बने कुल 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माता बगलामुखी का कांगड़ा स्थित है। यहाँ माता सती का बाहिना वक्ष गिरा था किंतु यहाँ आज जो देवी को समर्पित मंदिर है, यहां के निवासी बताते है त्रेतायुग से स्थापित है। मंदिर लंकापति रावण द्वारा बनाया गया था क्योंकि वह तांत्रिक अनुष्ठान करता था और माता की उपासना अपने शत्रुओं पर विजय पाने के लिए। बगलामुखी माता लंका में एक दूसरे नाम से भी जानी जाती है। रावण का पुत्र इंद्रजीत भी माँ का उपासक था और लक्ष्मजी को मूर्छित करने में उसकी बगलामुखी उपासना ही थी। 


माँ बगलामुखी मंदिर


बनखंडी बगलामुखी मंदिर:


मंदिर पहाड़ी वास्तुकला में निर्माण किया गया है। मंदिर के अंदर बाहर और ऊपर दीवारों का रंग पीला ही रखा गया है माँ बगलामुखी के सृजन की कथा के अनुसार। माँ का गर्भ ग्रह बहुत छोटा है। इसमें केवल 6 लोग ही एक समय में प्रवेश कर दर्शन पा सकते है। माँ के दाएँ और भगवान शिव और बाएँ ओर श्रीगणेश बैठे हैं। माता की मूर्ति अत्यंत आकर्षक है। माँ सोने के आसन पर विराजी है और माता के तीन नेत्र है। माता सवर्ण के आभूषणों से सजी हुई हैं। मंदिर के बाहर द्वार पर बजरँगबली और भैरव जी की मूर्ति। दोनों देव माता की गुफा की रक्षा कर रहे हैं। यहाँ श्री कृष्ण की मूर्ति भी एक मंदिर में दर्शन किये जा सकते हैं। 


माँ बगलामुखी दर्शन


मंदिर के बाहर बनी भोजशाला में लंगर दोपह 12 से 3 बजे के बीच चलता है। लंगर के प्रशाद में पीली डाल और चावल परोसा जाता है। 


यह रहस्यमयी मंदिर कांगड़ा के इतिहास के सबसे भयानक भूकंप के इतिहास का साक्षी है जब यहां सारे मंदिर कंपन से टूट गए पर बगलामुखी माता का यह शक्तिपीठ ज्यो का त्यों बना रहा। मंदिर में केवल माता की चरण पादुका वाली शिला को कुछ क्षति पहुंची।










इन्हें भी देखें:


मंदिर यज्ञ शाला:


मंदिर के बाहर बनी यज्ञशाला में दिन भर हवन किया जाता है। यहाँ अलग-अलग प्रकार के हवन सम्पन्न किये जाते है। शत्रु पर विजय पाने के लिए, नौकरी पाने के लिए और राजसत्ता में विजय प्राप्ति के लिए यज्ञ किये जाते है। उक्त सारे कार्यों के लिए किए जानेवाले यज्ञ की सामग्री भिन्न होती है। इन यज्ञ में ज़्यादातर उपयोग में आनेवली सामग्री है लाल मिर्च जिसे यज्ञ में बाहिने हाथ को अपने सर पे गोल घुमाके अग्नि कुंड में स्वाहा किया जाता है। 

माँ बगलामुखी को यज्ञ के लिए सबसे ज़्यादा उपयुक्त दिन है शनिवार, रविवार, मंगलवार और ब्रहस्पतिवार है। माँ यहाँ करवाये यज्ञ का फल 36 दिनों में देती है। यज्ञ करवाने की न्यूनतम राशी 3100 रुपये फिर जिस प्रकार का यज्ञ करवाने की इच्छा हो राशी उसी प्रकार रहती है। यज्ञशाला के बाहर लगे टिकट काउंटर पर से टिकट लिया जाता है। यज्ञ की एडवांस बुकिंग वेबसाइट से भी करवाई जा सकती है। 




वनखण्डी महादेव:


मंदिर से नीचे, उतरते समय आप प्राचीन वनखण्डी महादेव मंदिर के दर्शन कर सकेंगे होंगे। मंदिर के अंदर महादेव के सुंदर शिवलिंग के दर्शन होंगे। इस शिवलिंग की देहरा कस्बे में बड़ी मान्यता है। 


बनखण्डेश्वर महादेव



मंदिर दर्शन समय:


खुलने का समय: 5.00 AM

सुबह की आरती: 6.00 AM

भोग प्रशाद: 12.00 PM

मंदिर बंद(भोग का समय): 12.00 PM से 12.30 PM

संध्या आरती और शैय्या: 7.30 PM

मंदिर बंद:9.30 PM




कैसे पहुँचे


हिमांचल प्रदेश में अन्य शक्ति पीठ जैसे नैनादेवी, माँ चिंतपूर्णी और माता ज्वाला देवी सब एक दूसरे से 40 से 200 किमी की दूरी पर बसे हुए हैं। इन सब से राज्य बस परिवहन अच्छे से जुड़ा हुआ है। पड़ोसी राज्य पंजाब, जम्मू और हरियाणा, दिल्ली से बसें लगभग पूरे वर्ष चलती हैं। 


।। जय माँ बगलामुखी ।। 


✒️स्वप्निल. अ


अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें:-





  • https://lakesinhimachal.com/baglamukhi-temple-kangra-a-historical-and-religious-marvel-2/


 

तनोट राय माता मंदिर, जैसलमेर, राजस्थान

भारत-पाक सीमा पर तनोट राय माता मंदिर लगभग 1300 वर्षो से स्थापित है जिसकी आध्यात्मिक शक्ति का परिचय सन् 1965 और 1971 के युद्ध के समय शत्रु दे...